246. 26 जनवरी- गणतंत्र दिवस-हिन्दी कविता




"स्वतंत्रता दिवस" और "गणतंत्र दिवस"

 भारत के दो अनमोल पर्व  हैं

एक है शासन हाथ में देता

दूजा इसे 

चलाने का अधिकार है देता

  [ 1 ]

Govt. is of the people, by the people, for the people

अर्थात- 

अपने हितकारी राजा को

जनता मर्ज़ी से चुन सकती है

हित न चाहने वाले को   

जड़ से उखाड़ सकती है

जनता ही राजा,जनता ही प्रजा है

उसका ही फैसला सर्वे सर्वा है

वह अ‍ब किसी की दास नहीं, 

उखाड़ सकता है उसका एक वोट 

दु:शासन की गुलामी  की

 अब उसे जरूरत नहीं

   [ 2 ]

भूले जनता  भी-

जैसे राजा के हैं कर्तव्य यहां

प्रजा के भी हैं कुछ दायित्व यहां

दोनों पालन कर लें गर तो

बन जाए स्वर्ग यहां

   [3 ]

न भूलें शासक, न भूले प्रजा

अ‍पने-अपने दायित्वों  को

 उद्देश्य यही था बनाने का

गणतन्त्र, “गणराज्य” भारत को

   [4]
भूल न जाएं कही बातों को

"संविधान पुस्तिका" बनाई गई थी 

खो न जाए "बानी" पूर्वजों की

 अंकित इसमें की गई थी

लुप्त हो गई जो यह राष्ट्रीय पुस्तिका

सब कुछ खत्म हो जाएगा

नही मानेगा कोई कर्तव्य

गुलामी की ओर देश बढ़ जाएगा 

संजो कर रखो सभी नागरिक 

पूर्वजों की धरोहर को

जैसे रखते हैं सींच-सींच कर

फल देने वाले पेड़ों को  ॥

 धन्यवाद । जय भारत !

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                                 लेखिका-निरुपमा गर्ग

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