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Showing posts from September, 2024

236. =========श्री रामचरितमानस-सुन्दरकाण्ड शिक्षाएं [ Teachings] Hindi/ English

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                                                                                                                                    सुन्दरकाण्ड * सचिव बैद गुर तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस राज धर्म तन तीनि कर होइ बेगिहीं नास॥37॥ भावार्थ:- मंत्री, वैद्य और गुरु- ये तीन  यदि (अप्रसन्नता के) भय या (लाभ की) आशा से (हित की बात न कहकर) प्रिय बोलते हैं (ठकुर सुहाती कहने लगते हैं), तो  (क्रमशः) राज्य, शरीर और धर्म- इन तीन का शीघ्र ही नाश हो जाता है, क्योंकि बुद्धिमान मन्त्री डर से राजा को सही सलाह देना छोड देते हैं॥37॥ English: If ministers, doctors, or gurus speak pleasing words out of fear or flattery, the kingdom, righteousness and body are quickly destro...

235. =======श्री रामचरितमानस-लंकाकाण्ड शिक्षाएं [ Teachings] Hindi/ English ======

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  * नाथ बयरु कीजे ताही सों। बुधि बल सकिअ जीति जाही सों॥ भावार्थ :  हे नाथ! वैर उसी के साथ करना चाहिए, जिससे बुद्धि और बल के द्वारा जीत सकें।  English: Mandodry, the wife of Ravana, said," My Lord,  Enmity should be made only with one whom you can defeat with wisdom and strength. ----------------------------------------------------------------------------------- * संत कहहिं असि नीति दसानन। चौथेंपन जाइहि नृप कानन॥ तासु भजनु कीजिअ तहँ भर्ता। जो कर्ता पालक संहर्ता॥2॥ भावार्थ : मंदोदरी ने रावण को समझाते हुए कहा- हे दशमुख! संतजन ऐसी नीति कहते हैं कि चौथेपन (बुढ़ापे) में राजा को वन में चला जाना चाहिए। हे स्वामी! वहाँ (वन में) आप उनका भजन कीजिए जो सृष्टि के रचने वाले, पालने वाले और संहार करने वाले हैं॥2॥ English: Mandodari said to Ravana, "The sages and saints say, " O ten-headed one, in the fourth stage of life, a king should retire to the forest. There you should worship Him who is the creator, sustainer, and destroyer." * बचन परम हित सुनत कठोरे। सुनहिं जे कहहिं ते नर प्र...

234. ===Shree Ramchritmanasउत्तरकाण्ड में काकभुसुण्डी व गरुड संवाद =====

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काकभुसुण्डि एक चिरंजीवी ऋषि हैं जो कौवे के रूप में अमर हो गए, और गरुड़, पक्षियों के राजा, को रामचरितमानस की कथा सुनाते हैं । काकभुसुण्डि को लोमश ऋषि के श्राप के कारण कौवा बनना पड़ा, लेकिन राम मंत्र और इच्छामृत्यु के वरदान से वे अमर हो गए और भगवान राम के परम भक्त बने। गरुड़ के मन में राम के भगवान होने का संदेह था, जिसे काकभुसुण्डि ने रामकथा सुनाकर दूर किया।     प्र.1               *  * प्रथमहिं कहहु नाथ मतिधीरा। सब ते दुर्लभ कवन सरीरा॥ बड़ दुख कवन कवन सुख भारी। सोउ संछेपहिं कहहु बिचारी॥2॥ भावार्थ:- हे नाथ! हे धीर बुद्धि! पहले तो यह बताइए कि सबसे दुर्लभ कौन सा शरीर है फिर सबसे बड़ा दुःख कौन है और सबसे बड़ा सुख कौन है, यह भी विचार कर संक्षेप में ही कहिए॥ काकभुशुण्डिजी ने कहा- हे तात अत्यंत आदर और प्रेम के साथ सुनिए। मैं यह नीति संक्षेप से कहता हूँ॥ English: First of all, tell me, OLord of Wisdom! Which body is difficult to obtain? What is the greatest sorrow, and what is the greatest happiness? Consider this and tell me briefly. -...

233. Quiz on Lord Ganesha- माता पार्वती ने गणपति महाराज को पुत्र रूप में कैसे प्राप्त किया?

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                                [हिन्दी-भाग 1] प्र.1= माता  पार्वती ने  गणपति  महाराज को  पुत्र रूप में  कैसे प्राप्त किया? उ.=   माता  पार्वती ने  गणपति  महाराज को  पुत्र रूप में पुण्यक  व्रत के प्रभाव से प्राप्त किया । प्र.2=  गणपति  महाराज  का  वास्तविक रूप क्या है? उ.=    गणपति  महाराज  साक्षात  गोलोक के स्वामी  श्री  कृष्ण पार्वती के घर अवतरित उमा-महादेव के पुत्र हैं । पार्वती जी द्वारा पुण्यक नामक  कठोर व्रत का पालन करने पर कमलापति विष्णु भगवान ने स्वयं पार्वती जी को  अपने दिव्य रूप का दर्शन  कराया । पार्वती जी उस रूप को देख कर उसी रूप में अपने पुत्र की कल्पना करने लगी । भगवान  कृष्ण  ने उनकी गोद में आकर उनकी यह  इच्छा पूरी की । प्र3.=    गणपति  महाराज को 'गणेश' क्यों  कहा जाता है? उ.=  क्योंकि     गणपति  महारा...

232. 33 कोटि देवी-देवता कौन से हैं?

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  कोटि व करोडमें  अन्तर-                                          जो  अन्तर  मात्र और समूह में है                                           जो सीमित और असीमित में है     वस्तुत: 33 कोटि का अर्थ है 33 उच्चतम भगवान । वेदारण्यगोपनिश्द में  यग्य्वाल्कीय प्रश्नावली  में भी  पूछा  गया  है। 8 वसु,11रुद्र, 12आदित्य  2अश्विनी कुमारों को  मिला कर 33कोटि देवी-देवता  बनते हैं । यदि  विस्तार में  बताया जाए तो---- 1.    8 वसु  प्रकृति  के विभिन्न  भागों का प्रतिनिधित्व  करते  हैं  । जैसे-       अनिल अर्थात वायु,         अपस अर्थात  जल,          देओस अर्थात अंतरिक्ष,          धर...