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----------- ललिता सहस्त्रनाम- हिन्दी व्याख्या प्रारम्भ-------

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  -----------------------------------------------निरुपमा गर्ग   Note: Those who want to get the printed book, please let us know through the comment box:  Navratri 2025. श्रीललितासहस्रनामस्तोत्र (श्री  ललिता  के 1000 नाम) ऋषि वेद व्यास द्वारा रचित ब्रह्माण पुराण. का भाग है जिसमें हयग्रीव और ऋषि अगस्त्य के मध्य का संवाद है | भगवान विष्णु के अवतार हयग्रीव ने  श्रीललितासहस्रनाम के माध्यम से  अगस्त्य   ऋषि  को श्री विद्या उपासना की  दीक्षा  दी थी । मां भगवती के इस स्त्रोत का पाठ अत्यधिक फलदायी माना गया है।    लमित्यादि पन्चपूजा-    लं- पृथ्वी तत्वात्मिकायै श्री ललितादेव्यै गन्धं परिकल्पयामि । " हे पृथ्वी तत्व स्वरूपिणी श्री ललिता देवी , मैं आपको चंदन अर्पित   करती हूँ।" हं- आकाश तत्वात्मिकायै श्री ललितादेव्यै पुष्पं परिकल्पयामि ।  "हे आकाश तत्व की देवी, श्री ललिता देवी, मैं आपको पुष्प अर्पित करती हूँ"।   यं- वायु तत्वात्मिकायै श्री ललितादेव्यै धूपं परिकल्पयामि । "हे वायु तत्व की स्वामिनी श्री ललित...

ललिता सहस्त्रनाम हिन्दी व्याख्या - 30-59

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        -----------------------------------------------निरुपमा गर्ग Note: Those who want to get the printed book,please let us know through comment box  before N avratri 2025. 30.  ॐ कामेशबद्ध माङ्गल्य सूत्र शोभित कन्धरायै नमः -   कामेशबद्ध अर्थात जिनकी  गर्दन में कामेश्वर द्वारा बंधा हुआ  पवित्र धागा चमक रहा है, 31.  ॐ कनकाङ्गद केयूर कमनीय भुजान्वितायै नमः - जिनकी भुजाएँ सुन्दर रूप से  कनकाङ्गद केयूर अर्थात कनक यानी स्वर्ण बाजूबंदों से सजी हुई हैं, तथा- 32 . ॐ रत्नग्रैवेय -चिन्ताक-लोल -मुक्ता फलान्वितायै नमः - रत्नग्रैवेय अर्थात जिनकी गर्दन  रत्नजड़ित स्वर्ण पेंडेंट और मोतियों की माला  से शोभायमान है उन्हें नमस्कार , बार-बार नमस्कार हो । 33 से ले कर 43 तक मां के सभी अंगों का वर्णन है । हमारा उद्देश्य केवल मां के चरणों पर ही ध्यान केन्द्रित करना है अत: मां के अंगों  की व्याख्या वर्जित की गई है । 33.ॐ कामेश्वर प्रेम रत्नमणि प्रतिपण स्तन्यै नमः। 34.ॐ नाभ्याल वाल रोमालि लताफल कुचद्वय्यै नमः। 35.ॐ लक्ष्य रोम ...

ललिता सहस्त्रनाम हिन्दी व्याख्या - 60 - 99

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    ----------------------------------------------निरुपमा गर्ग N ote: Those who want to get the printed book,please let us know through comment box  before Navratri 2025. 60. ॐ कदम्ब वन वासिन्यै नमः - जो कदम्ब वन में निवास करती हैंं, 61. ॐ सुधासागर मध्यस्थायै नमः - जो अमृत सागर के मध्य में निवास करती हैं ,   62 . ॐ कामाक्ष्यै नमः -  जो अपनी दृष्टि से सब की इच्छाएं पूरी करती हैं ,  तथा- 63. ॐ काम दायिन्यै नमः – जो मनोवाण्छित मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली हैं , उन्हें नमस्कार , बार-बार नमस्कार हो ।  64. ॐ देवर्षि गण सङ्घात स्तूय मानात्म वैभायै नमः – जिनके गुणों की प्रशंसा सब देवता व ऋषिगण करते हैं ,    65. ॐ भण्डासुर वधो द्युक्त शक्तिसेना समन्वितायै नमः  - जो बंदसुर जैसे असुरों का  संहार करने पर आमदा शक्तियों की सेना से संपन्न हैं ,   66. ॐ सम्पत्करी समारूढ सिन्धुर व्रज सेवितायै नमः - जिनके साथ हाथियों का एक झुंड है , जिसका कुशल नेतृत्व सम्पतकर कर रहे हैं ,  तथा- 67. ॐ अश्वा रूढा+धिष्ठिताश्व कोटिकोटि भिरा+वृतायै ...

ललिता सहस्त्रनाम-हिन्दी व्याख्या- 100 - 137

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  ----------------------------------------------निरुपमा गर्ग Note: Those who want to get the printed book,please let us know through comment box  before Navratri 2025. 100. ॐ ब्रह्म ग्रन्थि विभेदिन्यै नमः - जो ब्रह्म की ग्रन्थि का विभेदन करती हैं 101. ॐ मणिपूरान्त रुदितायै नमः - जो मणिपूर चक्र में उभरती हैं ,   102. ॐ विष्णुग्रन्थिविभेदिन्यै नमः - जो भगवान विष्णु की ब्र्ह्म ग्रन्थि का  विभेदन करने की सामर्थ्य रखती हैं ,  तथा- 103 . ॐ आज्ञा चक्रान्तराल स्थायै नमः - जो आज्ञा चक्र के केंद्र में निवास करती हैं , उन्हें नमस्कार , बार-बार नमस्कार हो । 104. ॐ रुद्र ग्रन्थि विभेदिन्यै नमः - जो शिव की गिरह / ब्र्ह्म ग्रन्थि को पृथक करती हैं ,   105. ॐ सहस्रा+राम्बुजा रूढायै नमः - जो हजार पंखुड़ियों वाले कमल पर आरूढ़ हैं ,   106. ॐ सुधा+साराभि वर्षिण्यै नमः - जो अमृत की धारा की वर्षा करती हैं ,  तथा- 107. ॐ तडिल्लता समरुच्यै नमः - जो बिजली की चमक के समान सुन्दर हैं , उन्हें नमस्कार , बार-बार नमस्कार हो । 108. ॐ षट्चक्रो परिसंस्थितायै नमः - जो छह चक्रो...

ललिता सहस्त्रनाम- हिन्दी व्याख्या- 138 - 168

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  -------------------------------------------------निरुपमा गर्ग Note: Those who want to get the printed book,please let us know through comment box  before Navratri 2025. 138 . ॐ निराकुलायै नमः — जिन्हें भ्रमित लोगों द्वारा प्राप्त नहीं किया जा सकता ,   139. ॐ निर्गुणायै नमः - जो प्रकृति के तीनों गुणों अर्थात सत्व , रज और तम से परे हैं ,   140. ॐ निष्कलायै नमः - जो निष्काम हैं ,  तथा- 141. ॐ शान्तायै नमः — जो शांत मूरत हैं , उन्हें नमस्कार , बार-बार नमस्कार हो । 142 . ॐ निष्कामायै नमः - जो इच्छा रहित हैं ,   143. ॐ निरुप+प्लवायै नमः - जो अविनाशी हैं ,   144. ॐ नित्यमुक्तायै नमः - जो सांसारिक बंधनों से सदैव मुक्त हैं ,  तथा- 145. ॐ निर्विकारायै नमः - जो अपरिवर्तनशील हैं , उन्हें नमस्कार , बार-बार नमस्कार हो । 146 . ॐ निष्प्र पञ्चायै नमः - जो इस संसार के प्रपंचों से परे हैं ,   147. ॐ निराश्रयायै नमः - जो किसी चीज़ पर निर्भर नहीं हैं ,   148. ॐ नित्यशुद्धायै नमः - जो नित्य शुद्ध हैं ,  तथा- 149 ....