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Showing posts from December, 2023

217. === बूझो तो जानें-क्या आप रसगुल्ले की जड का नाम बता सकते हैं?

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                             1. वो कौन से   प्रत्यक्ष     देवता  हैं जिनमें  हम  ब्रह्मा, विष्णु, महेश के एक साथ दर्शन कर सकते हैं ।   2.अक्ल का खाना क्या है? अर्थात बुद्धि  क्या खाती है? 3.दुनिया में सबसे ज्यादा तबाही मचाने  वाला  हथियार कौन सा है? 4. क्या  आप रसगुल्ले की जड़  का  नाम  बता सकते  हैं? 5. ऊपर-नीचे दो  कटोरे, बीच  में  पडा तरबूज़  ।    खुद ही खुद को  काटे  जाए, अक्लमंद  वही जो इसका नाम बताए  ॥ 6. जो न  कभी था  और न ही  कभी  होगा -- बोलो क्या? 7. संसार में  ऐसा  कौन  है  जो सत्यवादी  है? 8. जब  ब्रह्मा जी  ने   सृष्टि  का निर्माण किया था  तो  उस समय दिन  का कौन सा पहर  था? 9. वह  क्या है जो सूर्य और चंद्र से छिपा  रहता  है? 10. कौन  सा   पुष्प...

216. ============ श्री रामचरित - अयोध्याकाण्ड-Videos =============

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                                                     नोट: सभी  एपिसोड  यहां  देने कठिन हैं । अत: कुछ ही दिए जा रहे हैं । सम्पूर्ण अयोध्याकाण्ड  youtube पर सुने जा सकते हैं ।               https://www.youtube.com/watch?v=t1xpJRUJZl0 ================================================ https://www.youtube.com/watch?v=HqQr6Wk7l9k&feature=shared =============================================== राम को वनवास https://www.youtube.com/watch?v=SnFvZMTLkAk ================================================= https://www.youtube.com/watch?v=c64NPVMQz30 =============================================  

215 ===== ऋषि भारद्वाज जी द्वारा राजा बीरबाहु से कही गई एकादशी की महिमा-======

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ऋषि भारद्वाज जी द्वारा राजा बीरबाहु से कही गई  एकादशी की महिमा- 1. जो  भक्त  गीत, वाद्य, नृत्य, पुराण पाठ,  धूप,  दीप, नैवेद्य,चन्दन का लेप,  श्री कृष्ण की निष्काम  भक्ति , श्रद्धा  दान,  और उत्साह सहित  प्रत्येक पहर में  आरती एकादशी की रात्रि में करते हैं वे  प्र्भु की  असीम कृपा  पाते  हैं । 2. जो व्यक्ति  किसी की निन्दा नहीं करते, व  इन्द्रियों पर संयम रखते  हैं वे भगवान को सदा ही प्रिय होते हैं । 3.जो इश्वर के समीप गूगल  और  कपूर मिला  कर धूप जलाता है, वह  अपने  लाखों  जन्मों की पाप राशि को  भस्म कर सकता  है । 4.यदि कोई कथा वाचक मिल जाए तो रात्रि  जागरण के  समय पुराण पाठ की व्यवस्था करानी  चाहिए ।  5. जो एकादशी की  रात्रि दीपदान करता है वह  एक- एक निमिष  गोदान का  फल  प्राप्त  करता  है । 6. जो भगवान  के  समक्ष  जागरण कर  पुराण की पुस्तक वाचता है वह  ईश्वर का  सानिध्य...

214 . ======= सोन नदी पुरुष नदी है या स्त्री नदी?======

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                       भारत  की नदियां जिनके नाम पुरुषों  के नाम पर हैं । 1.ब्र्ह्मपुत्र-  ब्रह्मपुत्र को "ब्रह्मा का पुत्र" कहा जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह भगवान ब्रह्मा के पुत्र हैं, इसलिए इसे पुरुष नदी या "नद" का दर्जा दिया गया है। 2.दामोदर- दामोदर नाम श्री कृष्ण का  बचपन का नाम  है ।  3.व्यास-  व्यास नदी का नाम  महान ऋषि वेद व्यास  के नाम पर पड़ा है , क्योंकि वह इसी नदी के किनारे निवास करते थे। 4.सोनभद्र-  आग्नेय पुराण  केअनुसार सोन नदी का मूल नाम सोहन था, जो बाद में सोन हो गया। यह भी ब्रह्मा जी का ही पुत्र था ।  प्राचीन काल में सोन नदी को सुषोमा के नाम से जाना जाता था। अमरकोश में इस नदी को हिरन्यवाहा के नाम से भी जाना जाता है। सोन नदी की बालू (रेत) पीले रंग की है जो सोने की तरह चमकती है। जिसके कारण इस नदी का नाम सोन पड़ा। ============================================================  

213 ========== अर्थ सहित श्री विष्णु सहस्त्रनामावलि ========

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                       श्री विष्णु सहस्र नामावलि 1.ॐ विश्वस्मै नमः ।-  जो स्वयं विश्व रूप हैं, उन्हें  नमस्कार,बार-बार नमस्कार  । 2.ॐ विष्णवे नमः ।- जो सब जगह व्याप्त हैं, उन्हें  नमस्कार,बार-बार नमस्कार  । 3.ॐ वषट्काराय नमः ।-जो  यज्ञ के समय आहुति के रूप में पूजे  जाते हैं, उन्हें  नमस्कार,बार-बार नमस्कार  । 4.ॐ भूतभव्यभवत्प्रभवे नमः ।-जो  भूत, वर्तमान और भविष्य तीनों कालों के स्वामी हैं, उन्हें  नमस्कार,बार-बार नमस्कार  । 5.ॐ भूतकृते नमः ।- सभी प्राणियों (भूतों) के रचयिता हैं" , उन्हें  नमस्कार,बार-बार नमस्कार  । 6.ॐ भूतभृते नमः ।- जो  समस्त सृष्टि का  भरण-पोषण करने वाले हैं, उन्हें  नमस्कार,बार-बार नमस्कार  । 7.ॐ भावाय नमः । 8.ॐ भूतात्मने नमः । 9.ॐ भूतभावनाय नमः । 10.ॐ पूतात्मने नमः  ॐ परमात्मने नमः । ॐ मुक्तानांपरमगतये नमः । ॐ अव्ययाय नमः । ॐ पुरुषाय नमः । ॐ साक्षिणे नमः । ॐ क्षेत्रज्ञाय नमः । ॐ अक्षराय नमः । ॐ योगाय नमः । ॐ योगवि...

212 . मैं निर्दोष हूं- अध्यात्मिक कथा

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एक बार नारद  धरती का भ्रमण करने पृथ्वी पर उतरे । चारों ओर सुन्दर सरोवर, समुद्र व हरियाली  देख कर उन्हें बहुत प्रसन्नता हुई । उन्हें लगा-कि मृत्यु लोक कितना सुन्दर है,इतने ही सुन्दर यहां के लोग होंगे, चारों ओर खुशियां होंगी । सोचते-सोचते  जैसे ही वे आगे बढे , उन्हें चीखो-पुकार सुनाई देने लगी । कोई जख्मी है,कोई बीमार है, कोई वियोग में तडप रहा है ।  उनके लिए यह सब देखना चंद क्षण ही कठिन हो गया । वे भागे-भागे भगवान नारायण के पास गए औरबोले- हे जगत नारायण । आप से ही यह सारा जगत व्याप्त है , संसार का सुख -दुख सब आप केही हाथ में है । आप  सबके पिता समान हैं फिर आप जगत-पिता अपनी सन्तानों को दु:ख कैसे दे सकते हैं?   इतना सुन भगवान नारायण बोले- नारद । तुम्हारा कथन अनुचित है । किसी के सुख-दु:ख में मेरा कोई हाथ नहीं है।                                                      " मैं सर्वथा निर्दोष हूं ।  नारद हंस पडे, ...

211 - ====== संस्कृत to Hindi सुभाषितानि==========

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* षड् दोषाः पुरुषेणेह हातव्या भूतिमिच्छता! निद्रा तद्रा भयं क्रोधः आलस्यं दीर्घसूत्रता !! हिन्दी अर्थ  : किसी व्यक्ति के बर्बाद होने के 6 लक्षण होते है – नींद, गुस्सा, भय, तन्द्रा, आलस्य और काम को टालने की आदत. ------------------------------------------------------------------------------------------------------------ कलहान्तानि हम्र्याणि कुवाक्यानां च सौहृदम् | कुराजान्तानि राष्ट्राणि कुकर्मांन्तम् यशो नॄणाम् || अर्थ:  झगडों से परिवार टूट जाते है | गलत शब्द के प्रयोग करने से दोस्ती टूट जाती है । बुरे शासकों के कारण राष्ट्र का नाश होता है| बुरे काम करने से यश दूर भागता है। ----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- सा भार्या या प्रियं बू्रते स पुत्रो यत्र निवॄति: । तन्मित्रं यत्र विश्वास: स देशो यत्र जीव्यते ॥ अर्थ:   जो मीठी वाणी में बोले वही अच्छी पत्नी है,  जिससे सुख मिले वह पुत्र, जिस पर विश्वास हो वह मित्र, और जहाँ आजीविका मिले वही देश  सबसे  अच्छा  है  ।...