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246. Indian States' Specialities-Which state has led India in fish production so far?

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  ========================================================================= Q.1- The Bomkai sari is a blend of silk and cotton fabrics, featuring geometric patterns along with traditional motifs. With which Indian state would you associate this sari?                                                                                                                   Ans: Odisha, often worn during festivals and religious events.                                                                               ...

245. स्वतंत्रता दिवस- कविता पढ़िए

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  गूंजी थी सन् 47 में जय हिन्द की जय- जय वाणी बन्धनमुक्त  हुई थी , प्रिय जननी सत्य जनों की खानी आज   सुनहरा  फिर से     वो  दिन  है आया तरंगों से ऊपर उठ कर खुशियों का सागर लहराया     [2] लाल किले पर यही दिन था   जवाहर ने तिरंगा लहराया था ऊंचे स्वर में  सूर्य-सुता- यमुना जी ने वन्दे भारत गाया था   [3] इसी लाल किले से हर वर्ष  प्रधानमन्त्री--- आज भी तिरंगा लहराते हैं    आजादी के पावन पर्व की  पवित्र परम्परा निभाते हैं अति उत्साह , उमंग के साथ  'जय हिन्द' का नारा लगाते हैं   [4] शहीदों के बलिदानों को वे अपना शीश झुकाते हैं "आदर करो  पूर्वजों का" बच्चों को "संदेश"  देते हैं  [5] पल भर में हम मुंह चला कर जिनका निरादर करते हैं  पड़  जाए  सींचना गर  एक  वृक्ष को  तो ज़र‌-ज़र पसीने झ ड़ते  हैं  [6] जो पूर्वजों का आदर कर न सके आज़ाद रहने का  उसे  अधिकार नहीं जो सींच न सके फलधारी वृक्ष को छाया  का भ...

244. बहुत खूब [ लघु कविता] पढ़िए

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       [1] ज़िन्दगी खूबसूरत है, लेकिन क्या आता है तुमको जीना? लहर,लहर लहराती दरिया क्या आता है तुमको इसमें तैरना?     [2] था  फूल सा तुम्हारा बाल्यकाल  खिलखिलाता सा था तुम्हारा बाग पर तुम रोए,खूब रोए क्या आता है कभी तुम्हें मलाल ?     [3] पहुंचे किशोरावस्था में तुम थी पढ्ने-लिखने की उम्र तुम्हारी होनी थी मेहनत में लग्न तुम्हारी क्या तुम "ये  सब ये कर पाए ?  समय का सदुपयोग क्या कर पाए ?    [4]  कुछ उम्र बीती खेल-कूद में कुछ बीती पढ्ने में बाकी बीती झगड़े में बिन बात के गुस्से में अगणित गिले-शिकवों में बीत गई जब ज़िन्दगानी तो बीते दिन पछतावों में  कभी सुकून से जी न पाए  चैन से रैन बिता न पाए     [5] जब हंसना था तो रोए खूब जब पढ़ना था तो घूमे खूब जब था मेहनत करना मौज उड़ाई खूब  गृहस्थी चलानी थी प्रेम से जब बेबाक किए झगड़े खूब  थी ज़िंदगी  खूबसूरत स्वर्ग सा  इसे बनाना था पर अपने ही हाथों  इसे नरक बनाया खूब  कर्म किए खुद उल्टे-सीधे दिया कभी दोष ई...

243 नवरात्रों में नौ देवियों के मंत्र

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  देवी    :     बीज मंत्र 1. शैलपुत्री : ह्रीं शिवायै नम:।  2. ब्रह्मचारिणी :  ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:।  3. चन्द्रघण्टा :  ऐं श्रीं शक्तयै नम:।  4. कूष्मांडा : ऐं ह्री देव्यै नम:।  5. स्कंदमाता : ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:।  6. कात्यायनी : क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम:। 7. कालरात्रि  : क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:।  8. महागौरी : श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:।  9. सिद्धिदात्री :  ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:।                                                                             [2]   देवी आराधना के पर्व नवरात्रि में उपासक अगर कठिन पाठ और मंत्र जप से डरते हैं तो नौ दिन तक मां दुर्गा के नौ रूपों की साधना दिव्य एकाक्षरी मंत्र से करना चाहिए। यह सरल मंत्र ही समस्त बाधा, अरिष्ट व अ...

242. 26 जनवरी- गणतंत्र दिवस-हिन्दी कविता पढ़िए

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"स्वतंत्रता दिवस" और "गणतंत्र दिवस"  भारत के दो  अनमोल  पर्व   हैं एक शासन  हाथ में देता   इसे  चलाने का दूजा नागरिकों को अधिकार    है  देता   [ 1 ] Govt. is of the people, by the people, for the people अर्थात-  अपने हितकारी राजा को जनता मर्ज़ी से चुन सकती है हित न चाहने वाले को     जड़ से  उखाड़   सकती है जनता ही राजा,जनता ही प्रजा है फैसला उसका ही  सर्वे सर्वा है वह अ‍ब किसी की  दास नहीं ,   दु:शासन की  गुलामी   की  उसे  अब  जरूरत नहीं     [ 2 ] न भूले जनता  भी- जैसे राजा के हैं कर्तव्य यहां प्रजा के भी हैं कुछ दायित्व यहां दोनों पालन कर लें गर तो बन जाए स्वर्ग यहां    [3 ] न भूलें  शासक,  न भूले  प्रजा अ‍पने-अपने दायित्वों  को  उद्देश्य यही था बनाने का गणतन्त्र ,  “गणराज्य” भारत को    [4] भूल न जाएं कहीं बातों को "संविधान पुस्तिका" बनाई गई थी  खो न जाए "बानी" ...

----------- ललिता सहस्त्रनाम- हिन्दी व्याख्या प्रारम्भ-------

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  -----------------------------------------------निरुपमा गर्ग   Note: Those who want to get the printed book, please let us know through the comment box:  Navratri 2025. श्रीललितासहस्रनामस्तोत्र (श्री  ललिता  के 1000 नाम) ऋषि वेद व्यास द्वारा रचित ब्रह्माण पुराण. का भाग है जिसमें हयग्रीव और ऋषि अगस्त्य के मध्य का संवाद है | भगवान विष्णु के अवतार हयग्रीव ने  श्रीललितासहस्रनाम के माध्यम से  अगस्त्य   ऋषि  को श्री विद्या उपासना की  दीक्षा  दी थी । मां भगवती के इस स्त्रोत का पाठ अत्यधिक फलदायी माना गया है।    लमित्यादि पन्चपूजा-    लं- पृथ्वी तत्वात्मिकायै श्री ललितादेव्यै गन्धं परिकल्पयामि । " हे पृथ्वी तत्व स्वरूपिणी श्री ललिता देवी , मैं आपको चंदन अर्पित   करती हूँ।" हं- आकाश तत्वात्मिकायै श्री ललितादेव्यै पुष्पं परिकल्पयामि ।  "हे आकाश तत्व की देवी, श्री ललिता देवी, मैं आपको पुष्प अर्पित करती हूँ"।   यं- वायु तत्वात्मिकायै श्री ललितादेव्यै धूपं परिकल्पयामि । "हे वायु तत्व की स्वामिनी श्री ललित...