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240. ======== =रामचरितमानस-शिक्षाएं [ हिन्दी ]=======

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  इस संसार में अपने सुख, वैभव, व उन्नति के उपायों के लिए हर प्राणी इधर-उधर भटकता रहता है ।  शायद ही कोई होगा जिसने गौर किया हो कि हमारे हिन्दू धर्म के दो ऐसे ग्रंथ हैं जिनमें कहे हुए उपदेशों-संदेशों को मान कर जीवन को सुखी किया जा सकता है । जरूरत है बस  उन्हें मानने  की। ऐसे ही  गहन अर्थ वाले संदेशों को श्री राम चरित में से  हमने निकाले हैं । मानने के लिए तो स्वयं  भगवान भी बाध्य नहीं  करते । गीता के 18वें अध्याय में श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा-                                        इति ते ज्ञानमाख्यातं गुह्याद्गुह्यतरं मया |                    विमृश्यैतदशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु || अर्थात हे अर्जुन!  इस प्रकार से मैंने तुम्हें यह ज्ञान समझाया, जो सभी गुह्यों से गुह्यतर है। इस पर गहनता के साथ विचार करो और फिर तुम जैसा चाहो वैसा करो। -----------------------------------------------------------------...