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242. 26 जनवरी- गणतंत्र दिवस-हिन्दी कविता

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"स्वतंत्रता दिवस" और "गणतंत्र दिवस"  भारत के दो  अनमोल  पर्व   हैं एक शासन  है    हाथ में देता दूजा  इसे  चलाने का  अधिकार    है  देता   [ 1 ] Govt. is of the people, by the people, for the people अर्थात-  अपने हितकारी राजा को जनता मर्ज़ी से चुन सकती है हित न चाहने वाले को     जड़ से  उखाड़   सकती है जनता ही राजा,जनता ही प्रजा है फैसला उसका ही  सर्वे सर्वा है वह अ‍ब किसी की  दास नहीं ,   दु:शासन की  गुलामी   की  उसे  अब  जरूरत नहीं     [ 2 ] न भूले जनता  भी- जैसे राजा के हैं कर्तव्य यहां प्रजा के भी हैं कुछ दायित्व यहां दोनों पालन कर लें गर तो बन जाए स्वर्ग यहां    [3 ] न भूलें  शासक,  न भूले  प्रजा अ‍पने-अपने दायित्वों  को  उद्देश्य यही था बनाने का गणतन्त्र ,  “गणराज्य” भारत को    [4] भूल न जाएं कही बातों को "संविधान पुस्तिका" बनाई गई थी  खो न जाए "बान...