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Showing posts from December, 2023

217. श्री रामचरित- सातवां सोपान-उत्तरकाण्ड में दी हुई सटीक बातें

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                             काकभुसुण्डि एक चिरंजीवी ऋषि हैं जो कौवे के रूप में अमर हो गए, और गरुड़, पक्षियों के राजा, को रामचरितमानस की कथा सुनाते हैं । काकभुसुण्डि को लोमश ऋषि के श्राप के कारण कौवा बनना पड़ा, लेकिन राम मंत्र और इच्छामृत्यु के वरदान से वे अमर हो गए और भगवान राम के परम भक्त बने। गरुड़ के मन में राम के भगवान होने का संदेह था, जिसे काकभुसुण्डि ने रामकथा सुनाकर दूर किया।     प्र.1               *  * प्रथमहिं कहहु नाथ मतिधीरा। सब ते दुर्लभ कवन सरीरा॥ बड़ दुख कवन कवन सुख भारी। सोउ संछेपहिं कहहु बिचारी॥2॥ भावार्थ:- हे नाथ! हे धीर बुद्धि! पहले तो यह बताइए कि सबसे दुर्लभ कौन सा शरीर है फिर सबसे बड़ा दुःख कौन है और सबसे बड़ा सुख कौन है, यह भी विचार कर संक्षेप में ही कहिए॥ काकभुशुण्डिजी ने कहा- हे तात अत्यंत आदर और प्रेम के साथ सुनिए। मैं यह नीति संक्षेप से कहता हूँ॥ *नर तन सम नहिं कवनिउ देही। मनुष्य शरीर के समान कोई शरीर नहीं है। चर-अचर सभी जीव ...

216. ============ श्री रामचरित - अयोध्याकाण्ड =============

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                                                     नोट: सभी  एपिसोड  यहां  देने कठिन हैं । अत: कुछ ही दिए जा रहे हैं । सम्पूर्ण अयोध्याकाण्ड  youtube पर सुने जा सकते हैं ।               https://www.youtube.com/watch?v=t1xpJRUJZl0 ================================================ https://www.youtube.com/watch?v=HqQr6Wk7l9k&feature=shared =============================================== राम को वनवास https://www.youtube.com/watch?v=SnFvZMTLkAk ================================================= https://www.youtube.com/watch?v=c64NPVMQz30 =============================================  

215 ===== ऋषि भारद्वाज जी द्वारा राजा बीरबाहु से कही गई एकादशी की महिमा-======

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ऋषि भारद्वाज जी द्वारा राजा बीरबाहु से कही गई  एकादशी की महिमा- 1. जो  भक्त  गीत, वाद्य, नृत्य, पुराण पाठ,  धूप,  दीप, नैवेद्य,चन्दन का लेप,  श्री कृष्ण की निष्काम  भक्ति , श्रद्धा  दान,  और उत्साह सहित  प्रत्येक पहर में  आरती एकादशी की रात्रि में करते हैं वे  प्र्भु की  असीम कृपा  पाते  हैं । 2. जो व्यक्ति  किसी की निन्दा नहीं करते, व  इन्द्रियों पर संयम रखते  हैं वे भगवान को सदा ही प्रिय होते हैं । 3.जो इश्वर के समीप गूगल  और  कपूर मिला  कर धूप जलाता है, वह  अपने  लाखों  जन्मों की पाप राशि को  भस्म कर सकता  है । 4.यदि कोई कथा वाचक मिल जाए तो रात्रि  जागरण के  समय पुराण पाठ की व्यवस्था करानी  चाहिए ।  5. जो एकादशी की  रात्रि दीपदान करता है वह  एक- एक निमिष  गोदान का  फल  प्राप्त  करता  है । 6. जो भगवान  के  समक्ष  जागरण कर  पुराण की पुस्तक वाचता है वह  ईश्वर का  सानिध्य...

214 . ======= सोन नदी पुरुष नदी है या स्त्री नदी?======

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                       भारत  की नदियां जिनके नाम पुरुषों  के नाम पर हैं । 1.ब्र्ह्मपुत्र-  ब्रह्मपुत्र को "ब्रह्मा का पुत्र" कहा जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह भगवान ब्रह्मा के पुत्र हैं, इसलिए इसे पुरुष नदी या "नद" का दर्जा दिया गया है। 2.दामोदर- दामोदर नाम श्री कृष्ण का  बचपन का नाम  है ।  3.व्यास-  व्यास नदी का नाम  महान ऋषि वेद व्यास  के नाम पर पड़ा है , क्योंकि वह इसी नदी के किनारे निवास करते थे। 4.सोनभद्र-  आग्नेय पुराण  केअनुसार सोन नदी का मूल नाम सोहन था, जो बाद में सोन हो गया। यह भी ब्रह्मा जी का ही पुत्र था ।  प्राचीन काल में सोन नदी को सुषोमा के नाम से जाना जाता था। अमरकोश में इस नदी को हिरन्यवाहा के नाम से भी जाना जाता है। सोन नदी की बालू (रेत) पीले रंग की है जो सोने की तरह चमकती है। जिसके कारण इस नदी का नाम सोन पड़ा। ============================================================  

213 ========== अर्थ सहित श्री विष्णु सहस्त्रनामावलि ========

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                       श्री विष्णु सहस्र नामावलि 1.ॐ विश्वस्मै नमः ।-  जो स्वयं विश्व रूप हैं, उन्हें  नमस्कार,बार-बार नमस्कार  । 2.ॐ विष्णवे नमः ।- जो सब जगह व्याप्त हैं, उन्हें  नमस्कार,बार-बार नमस्कार  । 3.ॐ वषट्काराय नमः ।-जो  यज्ञ के समय आहुति के रूप में पूजे  जाते हैं, उन्हें  नमस्कार,बार-बार नमस्कार  । 4.ॐ भूतभव्यभवत्प्रभवे नमः ।-जो  भूत, वर्तमान और भविष्य तीनों कालों के स्वामी हैं, उन्हें  नमस्कार,बार-बार नमस्कार  । 5.ॐ भूतकृते नमः ।- सभी प्राणियों (भूतों) के रचयिता हैं" , उन्हें  नमस्कार,बार-बार नमस्कार  । 6.ॐ भूतभृते नमः ।- जो  समस्त सृष्टि का  भरण-पोषण करने वाले हैं, उन्हें  नमस्कार,बार-बार नमस्कार  । 7.ॐ भावाय नमः । 8.ॐ भूतात्मने नमः । 9.ॐ भूतभावनाय नमः । 10.ॐ पूतात्मने नमः  ॐ परमात्मने नमः । ॐ मुक्तानांपरमगतये नमः । ॐ अव्ययाय नमः । ॐ पुरुषाय नमः । ॐ साक्षिणे नमः । ॐ क्षेत्रज्ञाय नमः । ॐ अक्षराय नमः । ॐ योगाय नमः । ॐ योगवि...

212 . =========== श्री रामचरितमानस में पढिए -जीवन में काम आने वाली शिक्षाएं==============

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1.  * बंदउँ नाम राम रघुबर को। हेतु कृसानु भानु हिमकर को॥ बिधि हरि हरमय बेद प्रान सो। अगुन अनूपम गुन निधान सो॥1॥ भावार्थ:- मैं श्री रघुनाथजी के नाम 'राम' की वंदना करता हूँ, जो कृशानु (अग्नि), भानु (सूर्य) और हिमकर (चन्द्रमा) का हेतु अर्थात्‌ 'र' 'आ' और 'म' रूप से बीज है। वह 'राम' नाम ब्रह्मा, विष्णु और शिवरूप है। वह वेदों का प्राण है, निर्गुण, उपमारहित और गुणों का भंडार है॥ ----------------------------------------------------------------------------------------------- *महामंत्र जोइ जपत महेसू। कासीं मुकुति हेतु उपदेसू॥ महिमा जासु जान गनराऊ। प्रथम पूजिअत नाम प्रभाऊ॥2॥ भावार्थ:- जो महामंत्र है, जिसे महेश्वर श्री शिवजी जपते हैं और उनके द्वारा जिसका उपदेश काशी में मुक्ति का कारण है तथा जिसकी महिमा को गणेशजी जानते हैं, जो इस 'राम' नाम के प्रभाव से ही सबसे पहले पूजे जाते हैं॥ ------------------------------------------------------------------------------------------------------- * राम नाम मनिदीप धरु जीह देहरीं द्वार। तुलसी भीतर बाहेरहुँ जौं चाहसि ...

211 - माताकी भेंट [ Song-22 ]- "जय बोलो अम्बे गौरी की<जय बोलो मात भवानी की" + video link

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भजन- जय बोलो अम्बे गौरी की, जय बोलो मात भवानी की-------              "जय  बोलो  अम्बे  गौरी  की<जय  बोलो  मात  भवानी  की"                    https://www.youtube.com/watch?v=WXXuAMQEZ0s ============================================== ==================================================