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247- सुभाषितानि-हितोपदेश

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                                             * कलहान्तानि हम्र्याणि कुवाक्यानां च सौहृदम् | कुराजान्तानि राष्ट्राणि कुकर्मांन्तम् यशो नॄणाम् || झगडों से परिवार टूट जाते है | गलत शब्द के प्रयोग करने से दोस्ती टूट जाती है । बुरे शासकों के कारण राष्ट्र का नाश होता है| बुरे काम करने से यश दूर भागता है।                           * सा भार्या या प्रियं बू्रते स पुत्रो यत्र निवॄति: । तन्मित्रं यत्र विश्वास: स देशो यत्र जीव्यते ॥ जो मीठी वाणी में बोले वही अच्छी पत्नी है,  जिससे सुख मिले वह पुत्र, जिस पर विश्वास हो वह मित्र, और जहाँ आजीविका मिले वही देश  सबसे  अच्छा  है  ।                          * कन्या वरयते रुपं माता वित्तं पिता श्रुतम् बान्धवा: कुलमिच्छन्ति मिष्टान्नमितरेजना: विवाह के समय कन्या सुन्दर पती चाहती है| उसकी माताज...